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Wednesday, 27 February 2013

पहला प्यार

***
पहला प्यार
ऐसे अचानक आता है
कि उस वक्त
हमारे पास न तो डायरी होती है
न कलम ।

इसीलिए
उसकी तारीख दर्ज करनी होती है
किसी मकान के पीछे की दीवार पर
या किसी पेड़ के खुरदुरे तने पर
या किसी मंदिर की पवित्र गंध में
या फिर धूल पर लिखी गयी इबारत में ।

जैसे घर के सामने
आम के पेड़ को देखने से
याद नहीं आता
कि धरती से कब फूटा था
इसका अंकुर,
कि वह किस सन् की बारिश थी
जिसने पहली बार भिगाया था
यह भी तो नहीं याद आता ।

याद बस इतना आता है
कि एक झूले में बैठकर
इतना ऊपर गये थे
कि दुनिया कंचे की तरह दिख रही थी
और नीचे आते समय
कलेजा मुहँ से बाहर निकलने को था ।

***
पहले प्यार के जीवाश्म
दबे रह जाते हैं
जीवन की परतों में ।

उम्र की सदियाँ गुजर जाने के बाद
अचानक किसी रोज
पड़ती है एक कुदाल
परतों के बीच से
कोई निकाल लाता है
पहले प्यार के गुणसूत्र ।

जैसे कोई राग था
जो किसी कंठ में
बजता रहा
बंदिशें बदल बदल कर ।

***
कि
एक नदी होता है
पहला प्यार !
जो एक पहाड़ से निकलती है
जिसकी धार पतली होती है शुरू में
और वेग ज्यादा,
और नही चलती सीधे रास्ते कभी भी ।

लगता है
जिस दिन निकली होगी
दुनिया की पहली नदी
उसी दिन पैदा हुआ होगा
पहला प्यार भी ।।
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