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Friday, 10 January 2014

पर्यटक

इनके लिए दर्शनीय है वो जगह
उनकी ज़िन्दगी जहाँ जमी जा रही है ।

उनके ठहराव में ही
इनकी गति है
लक्ष्मी चपल हो जाती है इनकी
जब उनकी धमनियों में
खून जमने लगता है
जड़ें पत्तियों तक
नहीं पहुँचा पातीं जीवन
पक्षियों की उड़ान
एक जुम्बिश तक के लिए
हो जाती है मोहताज

तब ये निकलते हैं पर्यटन पर ।

जमी हुई झील में फँसी नाव
और आँखों में जमी बूँद की
तस्वीर खींचते हुए
अपने आलिंगन को
सार्वजनिक करके
प्रमाणित करते हैं मोहक दाम्पत्य ।

ये धरती पर स्वर्ग खोजने निकलते हैं ।

गठिया वात में जकड़े


माँ बाप को
पड़ोसियों के भरोसे छोड़कर
जाते हुए
फर वाला कोट
और पशमीने की शॉल
लाने का वादा दुहराते हैं
तो बूढ़ी आँखों में आ जाती है
एक उदास चमक
और बेजान पैरों में
अचानक होती है
एक लाचार सी हरकत ।

अपना अपना खयाल रखने की
ताकीद के साथ
चार हथेलियां लहराती हैं
और दो जोड़ी
आँखों के मोतियाबिन्द
इन्हें विदा करते हैं
पर्यटन के लिए
एक और उजाड़ पर ।
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