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Saturday, 9 April 2011

प्रेमिका को पत्र

मेरी प्रिय तुम !

अब एक उम्र मेरी
और एक उम्र तुम्हारी मिलकर
एक लम्बी उम्र बनेगी.

अब एक लम्हा
दो लम्हों के बराबर होगा
एक मिनट दो मिनट के
एक महीना दो महीने के
और एक बरस
 दो बरस के बराबर होगा.

एक हँसी की जो आवाज़
वहाँ तक गूँजती थी
अब वहाँ से वहाँ तक गूँजेगी.

प्रिये,
 लौटती डाक से बताना
कि तुम्हारे पिता के बैंक में
मेरे पिता का फिक्स्ड डिपॅाज़िट
कितने दिनों में डबल हो जायेगा ?
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