Pages

Sunday, 4 December 2011

कविता : ' जो इतिहास में नहीं होते '


जो लोग इतिहास में  
दर्ज़ नहीं हो पाते
उनका भी एक गुमनाम इतिहास होता है.

उनके किस्से
मोहल्ले की किसी तंग गली में
दुबके मिल जाते हैं.
किसी पुराने कुएं की जगत पर
सबसे मटमैले निशान में भी
उन्हें पहचाना जा सकता है.

ऐसे लोग, आबादी के
किसी विस्मृत वीरान के
सूनेपन में टहलते रहते हैं.

एक पुराने मंदिर के मौन में
गूँजती रहती है इनकी आवाज़.

कुछ तो 
अपनी सन्ततियों के पराजयबोध में
जमें होते हैं तलछट की तरह.
तो कुछ
पुरखों की गर्वीली भूलों की दरार में
उगे होते हैं दूब की तरह.

जिन लोगों को 
इतिहास में कोई ज़गह नहीं मिलती
उन्हें कोई पराजित योद्धा
अपने सीने की आग में पनाह देता है.

ऐसे लोगों को
गुमसुम स्त्रियाँ
काजल की ओट में भी
छुपाए लिए जाती हैं अक्सर.

ऐसे लोग 
जो इतिहास में नहीं होते
किसी भी समय
ध्वस्त कर देते हैं इतिहास को।

Post a Comment